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The Magical Web Bridge

I love birds. From there stems my desire to pick up any book with a story of a bird, with birds on the cover or in any of its pages. 

Proma Basu Roy Parag Reads 03 April 2020

क्या तुम हो मेरी दादी ?

कुछ दिन से बच्चों के साहित्य में अलग-अलग तरह के विषयों पर लिखा जाने लगा है – जैसे की मृत्यु, विकलांगता, अलगाव, थर्ड जेंडर इत्यादि। यह ऐसी स्थितियां हैं जो बहुतेरे बच्चों के अनुभवों में होती हैं।

Nitu Singh Parag Reads 20 March 2020

A Book of Our Times

“There was once a man who believed he owned everything and set out to survey what was his.”
The first line of Oliver Jeffers’ new book gives you a hint that something important is going to unfold.

Swaha Sahoo Parag Reads 06 March 2020

Stories for children and Stories of children

Sitting with children is like sitting in a time machine. It takes you to your own childhood days. I had the good fortune of spending a good part of 2019 with children,…

Nagesh Hegde Parag Nurtures 28 January 2020

सूरज चंदा साथ साथ

सूरज चंदा साथ साथ यह एक कहानी की किताब है जिसे नेशनल बुक ट्रस्ट ने पब्लिश किया है। इस किताब के लेखक संजीव जायसवाल है और चित्रांकन किया है इरशाद कप्तान ने। इस किताब मे मात्र २८ पन्ने है।

Gajendra Raut Parag Reads 24 January 2020

डर साझा किए जाने वाली बात है

विज्ञान कहता है कि एक पेड़ की कोई दो पत्तियां भी एक जैसी नहीं होतीं। उसी तरह बच्चे परिवार के हों या समाज के, उनका स्वभाव और व्यक्तित्व भी अलग-अलग ही होता है।

Navnit Nirav Parag Reads 17 January 2020

A Gentle Story with a Powerful Message

A Gentle Story with a Powerful Message

Khaled Hosseini is one of my favourite authors and when I chanced upon a book by him for children/young readers I was excited…

Swaha Sahoo Parag Reads 03 January 2020

स्वीडिश रचनाओं का गुलदस्ता: खुल जा सिम सिम

स्वीडिश रचनाओं का गुलदस्ता: खुल जा सिम सिम

पिछले महीने मैं उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले में अपने काम के सिलसिले में गया था। एक सरकारी विद्यालय की लाइब्रेरी में एक मज़ेदार किताब मेरे हाथ लगी

Navnit Nirav Parag Reads 27 December 2019

गिजुभाई के ख़जाने से आती गुजराती लोक कथाओं की खुशबू

गिजुभाई के ख़जाने से आती गुजराती लोक कथाओं की खुशबू

शिल्प और कथन के हिसाब से देखा जाय तो लोक-कथाएँ सम्पूर्ण जान पड़ती हैं। इन कहानियों को पहली पीढ़ी ने दूसरी पीढ़ी को, दूसरी ने तीसरी, तीसरी ने चौथी को सुनाया होगा…

Navnit Nirav Parag Reads 13 December 2019

स्मृतियों का नाचघर

उदारीकरण के बाद हमारे देश की सामाजिक संरचना के ढाँचे में परिवर्तन आया है। उसकी प्रतिष्ठा सकल घरेलू उत्पाद और प्रति व्यक्ति आय से अनुमानित की जाती है। इसने कला-संस्कृति को सबसे ज्यादा नुकसान पहुँचाया है।

Navnit Nirav Parag Reads 29 November 2019