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किताबें झांकती हैं बंद अलमारी के शीशों से’, read Gulzar in one of his poems. As I re-read it, I wondered if these ‘band almaris’ had been open. If they had been open, has everyone consumed the pleasure of books before the almirahs closed? Will they be open forever?

Ms Ajaa Sharma Parag Nurtures 16 April 2019

एक दिन जब अमोस मक गी बीमार पड़े

इस किताब से मैं हाल ही में परिचित हुई और पढ़ते ही इसकी अपनी एक कॉपी की चाह मन में बन गई| कवरपेज देखकर ही पता चलता है की इस किताब को चित्रांकन के लिए एक अवार्ड भी मिला है और किताब देखकर ये स्पष्ट हो जाता है की क्यों मिला होगा|

Ms Ajaa Sharma Parag Reads 12 April 2019